अब आई नई तकनीक, हैक नहीं हो पाएगी वीडियो कॉल - सौरभ कुमार श्रीवास्तव
चीन ने खास तकनीक की मदद से ऐसी वीडियो कांफ्रेंसिंग करने में सफलता पाई है, जिसे हैक करना नामुमकिन है। हाल ही में उसने बीजिंग से विएना तक दुनिया की पहली ऐसी अंतरमहाद्वीपीय वीडियो कॉल की।
इसे क्वांटम की डिस्ट्रिब्यूशन (क्यूकेडी) तकनीक के जरिये अंजाम दिया गया। इसके लिए खास उपग्रह बनाने के साथ ही जमीन पर खास उपकरणों से लैस केंद्र बनाया गया।
इसे चाइनीज अकादमी ऑफ साइंसेज के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है। उनके अनुसार इसे सरकारी, बैंकिंग और सुरक्षा से संबंधित सेवाओं में इस्तेमाल किया जा सकेगा।
क्यूकेडी से मिली सफलता : किसी भी संचार को गुप्त रखने के लिए इस तकनीक का प्रयोग होता है। इसमें भौतिकी की क्वांटम मेकेनिक्स के जरिये सीक्रेट कीज विकसित की जाती है। इन कीज के बारे में सिर्फ उन दो ही पक्षों को पता होता है जिन्हें संचार करना होता है। इससे दोनों पक्ष गुप्त संचार को अंजाम देते हैं। इसमें एक ही फोटॉन का प्रयोग होता है।
विएना तक की गई कॉल : चीन के चाइनीज अकादमी ऑफ साइंसेज के अध्यक्ष चुनली बेई ने इस तकनीक से दुनिया की पहली वीडियो कॉल विएना स्थित ऑस्ट्रिया अकादमी ऑफ साइंसेज के अध्यक्ष एंटन जीलिंगर को की। अभी वैज्ञानिक सिंगापुर, इटली, जर्मनी, चीन और रूस के अलग-अलग स्थानों पर भी ऐसी ही वीडियो कॉल करके इस तकनीक का परीक्षण करेंगे।
उपग्रह से बढ़ाया दायरा : अभी तक क्यूकेडी के जरिये सिर्फ सीमित दूरी तक ही संचार करना मुमकिन था। लेकिन चीन ने इसका दायरा बढ़ाने के लिए मिसियस उपग्रह स्थापित किया है। इसे 2016 में लांच किया गया था। 590 किग्रा वजनी मिसियस में गुप्त संचार के लिए विशेष क्यूकेडी ट्रांसमीटर, एक क्वांटम टेलीपोर्टेशन रिसीवर और एक एनालाइजर लगा है।
जमीन में केंद्र बनाए : चीन ने तिब्बत में खास ट्रांसमीटर और अन्य उपकरणों से लैस केंद्र बनाया है। इसी के जरिये उपग्रह के लिए एक फोटॉन भेजा गया। जिसने अपलिंग कांफिगुरेशन प्रक्रिया के जरिये संचार को अंजाम दिया। चीन और तिब्बत में ऐसे पांच और केंद्र बनाने की योजना है।


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